त्वचा पर बाहरी रूप से प्रयोग में ली जाने वाली दवाइया होम्योपैथी के अनुसार अधिकतर बीमारिया मुह द्वारा सेवन करने से ही ठीक हो जाती है। बाहरी रूप से खास जरूरत नही पड़ती है लेकिन कभी कभी इसकी सी जरूरत पड़ सकती है। ये दवाईयां निम्न है ।

एसिड कार्योल, एकोनाइट, एकेनेशिया, एपिस अर्निका, बेलेडोना, बेलिस পनिस, ब्रायोनिया, कैलेण्डुला, कौस्टिकम, यूप्रेसिया, हैमामेलिस, हाइड्रेस्टिस, পइपेरिकम, लिडम, प्लैण्टागों, फाइटोलका, रस टोक्स, रूटा, सिम्फाइटम, थूजा, आर्टिका यूरेन्स, विरेट्रम विरिडि, इस्क्युलस, एमोन कोस्ट, बैलसेगम, स्टेफिसेग्रिया, कॉचलिरिया।

एसिड क्राइसो – दाद

ऐसिड कार्बोल – सडे हुए बदबूदार घाव धोने के लिए पानी में मिलाकर, जलने के बाद बने घाव पर।

एपिस – मलद्वार से रोग, अंड कोष फूल कर लाल रंग का हो, गरम हो, दर्द हो तो इसके मद टिंचर की 25 बूंद वैसेलिन में मिलाकर लगाए।

अर्निका – यदि चोट में त्वचा फटी नही हो तो इसके मदर टिचर को या वैसलिन में मिलाकर लगाएं।

एमोन कौस्टिक – जहरीले कीट, पतंगें के काटने के स्थान पर ।

बैलसम पेरू – कीड़े मारने के लिए. खुजली।

कैलेण्डुला – कोई स्थान कट जाने पर 1 भाग मदर टिचर, 20 भाग गरम पानी में मिलाकर कपड़ा भिगोकर बाध दें, ब्लीडिंग बंद हो जायेगी तथा दर्द भी कम होगा इसके अलावा घाव पर भी लगाने के लिए।

हैमोमेलिस – किसी स्थान पर शिरा फूल जाने पर 1 भाग मदर टिचर 20 भाग गरम पानी में मिलाकर फॉमेण्टेशन करें।

लिडम – काटा, सुई, कील गड़ जाने पर इसका गरम सेंक करें।

रस टॉक्स – गांठों में दर्द, पुरानी चोट में दर्द हो तो मदर टिंचर लगाएं

कैन्थेरिस– कोई भाग जल जाने पर।

रूटा – रेक्टम का प्रोलेप्स होने पर या बाहर निकलने के बाद वापस अंदर नहीं जाने पर इसकी 30 या 200 पोटेन्सी मुंह तथा मदर टिंचर का वैसलिन में मिलाकर लगाए।

सिम्फाइटम – हड्डी टूट जाने पर या चोट लगने पर इसका थूजा – कुछ मस्सों के ऊपर लगाने से जल्दी फायदा होता है। बनाकर बांधे ।